राष्ट्रीय

हिंदी पत्रकारिता और ‘उदन्त मार्तण्ड’ पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन

कोलकाता, । हिंदी पत्रकारिता के प्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ की विरासत और हिंदी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के विकास में पत्रकारिता की भूमिका पर केंद्रित द्वि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी कोलकाता में रविवार को संपन्न हुई। कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज और भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश के शिक्षाविदों, पत्रकारों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, सिक्किम के कुलपति प्रो. मोहन के ने कहा कि नवजागरण की भूमि बंगाल से ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन के साथ शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता ने देश में स्वातंत्र्य चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साहित्यकार डॉ. प्रेमशंकर ने वर्तमान पत्रकारिता की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक चेतना के प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।

भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार मिश्र ने कहा कि कलम की शक्ति तलवार से भी अधिक प्रभावशाली रही है, जिससे अंग्रेजी शासन भी भयभीत था।

वरिष्ठ पत्रकार राज मिठौलिया ने हिंदी पत्रकारिता के शुरुआती दौर की कठिन आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी पत्रकार विषम परिस्थितियों में कार्य करने को विवश हैं। कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या प्रो. सत्या उपाध्याय ने कहा कि यह आयोजन केवल शैक्षणिक विमर्श नहीं, बल्कि भारतीय भाषिक चेतना और राष्ट्रीय नवजागरण के इतिहास का स्मरण-पर्व है।

भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के महासचिव प्रो. संजीव कुमार दुबे ने कहा कि परिषद हिंदी प्राध्यापकों के क्षमता संवर्धन और अकादमिक उन्नयन के उद्देश्य से देशभर के शिक्षकों को एक मंच प्रदान कर रही है।

संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में देश के अनेक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए विद्वानों ने पत्रकारिता, साहित्य, भाषा, सांस्कृतिक संरक्षण, भाषाई अस्मिता और ई-पत्रकारिता जैसे विषयों पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। उद्घाटन सत्र में केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से आए विद्वानों ने विचार रखे, जबकि विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता और संचालन देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने किया।

द्वितीय दिवस के समानांतर सत्रों में लगभग 100 शोधार्थियों ने अपने प्रपत्रों का वाचन किया। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने समय-समय पर भारतीय जनमानस की चेतना को प्रखर बनाने का कार्य किया है तथा भाषा, लिपि, राजभाषा और राष्ट्रभाषा जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को जनता के समक्ष निर्भीकता से रखा है। उन्होंने पत्रकारिता में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता पर भी बल दिया।

‘उदन्त मार्तण्ड’ केंद्रित समापन सत्र में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सार्क जर्नलिस्ट फोरम की ओर से विभिन्न पत्रकारों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों को स्मृति सम्मान तथा ‘उदन्त मार्तण्ड शिखर सम्मान’ प्रदान किया गया। नेपाल से आए अतिथि रुद्र सुवेदी ने नेपाली पत्रकारिता में हिंदी के योगदान पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान हिंदी पत्रकारिता, भाषा, साहित्य और संस्कृति से संबंधित पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। आयोजन को सफल बनाने में कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज के शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों तथा विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

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