मुरादनगर में एनजीटी आदेशों की खुलेआम अवहेलना, नहर पटरी पर आग से पशु-पक्षी हो रहे भस्म
नहर पर निगरानी क्यों नहीं रखी जाती

दीपक त्यागी मुरादनगर, संवाददाता
गंगानगर पटरी से खतौली तक फैली नहर पटरी पर पिछले तीन वर्षों से लगातार आग लगाने की घटनाएं हो रही हैं। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में पूरी तरह मौन हैं। बार-बार शिकायतें करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे झाड़ियों में रहने वाले पशु-पक्षी जलकर राख हो जाते हैं। किसानों पर पराली जलाने पर सैटेलाइट की मदद से जुर्माना वसूला जाता है, लेकिन नहर पटरी पर आग लगाने वालों पर यह सख्ती क्यों नहीं दिखाई जा रही? स्थानीय लोगों का सवाल है कि दोहरी नीति क्यों अपनाई जा रही है?मुरादनगर क्षेत्र में गंगानगर पटरी से लेकर खतौली तक का इलाका हरा-भरा है, जहां झाड़ी-झुंडों के कारण जंगली जानवर, खरगोश, लोमड़ी, मोर समेत कई प्रजाति के पक्षी निवास करते हैं।

पिछले तीन साल से हर साल गर्मियों में यहां आग लगाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय किसान और ग्रामीण रामकिशोर ने बताया, “हर साल मार्च-अप्रैल में कोई न कोई आग लगा देता है। झाड़ियां सूख जाती हैं और आग तेजी से फैल जाती है। कई बार तो पशु चीत्कार करते हुए जल जाते हैं। हमने तहसील, एसडीएम और वन विभाग को शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं।” इसी तरह, ग्राम प्रधान सरिता देवी ने कहा, “एनजीटी ने खुले में आग लगाने पर सख्ती के आदेश दिए हैं। किसानों पर पराली जलाने को लेकर ड्रोन और सैटेलाइट से निगरानी कर लाखों का जुर्माना वसूला जाता है। लेकिन यहां नहर पटरी पर आग लगाने वाले कौन हैं? इन्हें क्यों छोड़ा जा रहा है?”स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह आग जानबूझकर लगाई जा रही है। कुछ असामाजिक तत्व झाड़ी-झुंड साफ करने के बहाने आग लगा देते हैं, जिससे इलाके में प्रदूषण फैलता है और जैव विविधता नष्ट हो रही है। पर्यावरण प्रेमी डॉ. अजय शर्मा ने कहा, “यह इलाका प्रवासी पक्षियों का भी ठिकाना है। आग से न केवल पशु-पक्षी मर रहे, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी कम हो रही है। एनजीटी के आदेशों का पालन न होने से प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल यहां क्यों नहीं?”प्रशासनिक अधिकारियों से जब इस बारे में बात की गई तो एसडीएम ने कहा, “हमें ऐसी शिकायतें मिलती रहती हैं। हम वन विभाग और पुलिस के साथ मिलकर निगरानी बढ़ाएंगे। आग लगाने वाले ज्यादातर असामाजिक तत्व होते हैं, जिनकी पहचान मुश्किल है। लेकिन सैटेलाइट और ड्रोन से जांच कर कार्रवाई की जाएगी।” वहीं, वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पराली जलाने पर जुर्माना इसलिए आसान है क्योंकि किसान की पहचान आसानी से हो जाती है। यहां आग लगाने वाले रात में आते हैं और भाग जाते हैं। फिर भी, हम पेट्रोलिंग बढ़ा रहे हैं।”मुरादनगर तहसील क्षेत्र में नहर पटरी का महत्वपूर्ण स्थान है। यह गंगानगर से खतौली तक 20 किलोमीटर से अधिक लंबी है, जो किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती है। लेकिन झाड़ी-झुंडों के कारण नहर का रखरखाव मुश्किल हो जाता है। सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार, नाममात्र को ही ग्वार (झाड़ी) हटाने का काम होता है। शिकायतों के बावजूद मशीनरी या मजदूर नहीं भेजे जाते। एक किसान नेता ने कहा, “पराली जलाने पर 2500 से 50 हजार तक जुर्माना लगता है। नहर पटरी पर आग लगाने पर भी यही सजा होनी चाहिए। सैटेलाइट इमेजरी से आग की लोकेशन ट्रैक की जा सकती है।”पर्यावरणविदों का मानना है कि यह दोहरी नीति ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को कमजोर कर रही है। एनजीटी ने 2021 में ही खुले में कचरा जलाने और आग लगाने पर प्रतिबंध लगाया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी पराली जलाने पर सख्ती बरती, जिसमें इस साल हजारों किसानों पर जुर्माना लगाया गया। लेकिन नहर पटरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर लापरवाही बरती जा रही है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन सर्वे और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं।स्थानीय पत्रकार संघ के अध्यक्ष ने कहा, “प्रशासन को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। असामाजिक तत्वों को चिह्नित कर सजा दी जाए। अन्यथा, यह पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनेगा।” ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मिलने का समय मांगा है। फिलहाल, नहर पटरी पर आग की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही, और प्रशासन की चुप्पी सवालों को जन्म दे रही है।
- आधिकारिक कथन: आधिकारिक कथन:
- नहर पटरी पर आग लगने की सूचना मिली है संबंधित अधिकारीक अवगत करा दिया गया है जल्द ही उचित करवाई की जाएगी।
- विकास कश्यप एडीएम गाजियाबाद
- पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड:
- गंगनर पटरी पर आग लगने की सूचना मिली है इस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी सुनने में आया है पहले भी यह घटनाएं होती रही हैं इस पर नहर विभाग पर भी कार्रवाईकी जाएगी की नहर पर निगरानी क्यों नहीं रखी जाती
- सहायक अभियंता प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड विपुल कुमार



