
विजयनगर मिलट्री ग्राउंड स्थित श्री सनातन धर्म रामलीला कमेटी में मंचन के पहले दिन ‘सती मोह’ और ‘नारद मोह’ के प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया। इन दोनों पौराणिक कथाओं के माध्यम से कलाकारों ने दर्शकों को भक्ति, अहंकार और भगवान की अटूट लीलाओं का संदेश दिया।
लीला की शुरुआत ‘सती मोह’ प्रसंग से हुई। जब भगवान श्रीराम अपनी पत्नी सीता के वियोग में वनों में भटक रहे थे, तब माता सती को उनके भगवान होने पर संदेह हुआ। श्रीराम की परीक्षा लेने के लिए उन्होंने सीता जी का रूप धारण किया। लेकिन अंतर्यामी प्रभु ने उन्हें पहचान लिया, जिसके बाद सती का भ्रम दूर हुआ। इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
इसके बाद मंच पर कलाकारों ने ‘नारद मोह’ का बेहद आकर्षक मंचन किया गया। अपनी कठिन तपस्या पर अहंकार करने वाले देवर्षि नारद के घमंड को तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी माया रची। नारद मुनी एक राजकुमारी के स्वयंवर में जाने के लिए भगवान विष्णु से सुंदर रूप मांगते हैं, लेकिन प्रभु उन्हें ‘हरि रूप’ (वानर का मुख) दे देते हैं। स्वयंवर में उपहास होने और सच्चाई पता चलने पर क्रोधित नारद भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं।
इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार गुप्ता, महासचिव सतीश शर्मा, कोषाध्यक्ष गिरीश मेहता, सहसंयोजक बाबूराम गौतम, देवेंद्र त्रिपाठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र अग्रवाल, सुनील कुमार शर्मा, सहसचिव रवि कौशिक, उपाध्यक्ष अरविंद कौशिक, विकास त्यागी, मनोज नागर मौजूद रहे।



