राष्ट्रीय

शांति लेख: भारत के तकनीकी परिदृश्य में एक युगांतरकारी क्रांति

धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों द्वारा ‘SHANTI विधेयक’ (SHANTI Bill) के पारित होने को भारत के तकनीकी और डिजिटल इतिहास का एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर एक सुरक्षित, पारदर्शी और नवाचार-अनुकूल तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह कानून न केवल डेटा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा भी प्रदान करेगा। इस कदम से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और यह ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए नए द्वार खुलेंगे।

विधेयक के प्रावधानों का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कानून सामान्य नागरिकों के डिजिटल अधिकारों की रक्षा करने और तकनीकी क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के बीच एक सटीक संतुलन बनाता है। SHANTI विधेयक के माध्यम से सरकार ने तकनीकी अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार करने की प्रतिबद्धता दिखाई है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी। यह विधेयक विशेष रूप से साइबर सुरक्षा के ढांचे को आधुनिक बनाने और डिजिटल बुनियादी ढांचे को बाहरी खतरों से सुरक्षित रखने पर केंद्रित है। संसद में इस विधेयक को मिलने वाला व्यापक समर्थन यह दर्शाता है कि भारत अपनी तकनीकी संप्रभुता को लेकर कितना गंभीर है और कैसे वह विश्व पटल पर एक ‘डिजिटल लीडर’ के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ कर रहा है।

भविष्य की ओर देखते हुए, प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि SHANTI विधेयक भारत को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला (Global Tech Supply Chain) के केंद्र में स्थापित करेगा। यह कानून न केवल बड़े तकनीकी निगमों के लिए जवाबदेही तय करेगा, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और समावेशिता को भी बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियानों का एक एकीकृत विस्तार है, जो युवाओं के लिए रोजगार के लाखों अवसर पैदा करेगा। यह विधेयक आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा सुरक्षित डिजिटल भविष्य सुनिश्चित करने का प्रयास है, जहाँ तकनीक का उपयोग मानव कल्याण और राष्ट्रीय प्रगति के लिए किया जा सके। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ, भारत अब वैश्विक डिजिटल शासन (Global Digital Governance) के नियमों को आकार देने की स्थिति में आ गया है।

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