अध्यात्म

*छत्र और शुक्ल योग और चतुर्ग्रही योग में आरंभ होंगे नवरात्रि*

*19 मार्च को नवरात्रि में घट स्थापना के शुभ मुहूर्त*

शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु  अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद।

पंडित शिवकुमार शर्मा के अनुसार 

19 मार्च 2026 को संवत्सर 2083 चैत्र माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 6:53 बजे से आरंभ होगी। तभी से वसंतिक नवरात्रि भी आरंभ होंगे। 

पालकी पर सवार होकर मां भगवती आएंगी।

बृहस्पतिवार को उत्तराभाद्र नक्षत्र से छत्र बनता है और 28 योगों में से शुक्ल योग बहुत शुभ है। इसके साथ-साथ प्रातः प्रतिपदा आरंभ होने से आरंभ होने के समय प्रातः 6:53 बजे से आकाश में मीन लग्न होगा।  मीन लग्न में चार ग्रह अर्थात चतुर्ग्रही  योग बन रहा है। चंद्र से गुरु केंद्र में होने से गजकेसरी योग भी बन रहा है। ऐसे शुभ योग में नवरात्र आरंभ हो रहेहैं। 

*घट स्थापना के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं*:

प्रातः 7:42 बजे से 9:18 बजे तक मेष लग्न चर लग्न रहेगा। जो बहुत शुभ है। 

9:19 बजे से 11:12 बजे तक वृषभ लग्न जो स्थिर लग्न है। घट स्थापना के लिए उत्तम लग्न है। 

11:13 बजे से 13:26 बजे तक मिथुन लग्न श्रेष्ठ है। इसी लग्न में अभिजीत मुहूर्त भी पड़ेगा ,जो बहुत ही उत्तम योग है ।।

इसके अलावा चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार भी आप घट स्थापना कर सकते हैं। चौघड़िया मुहूर्त में चर, शुभ लाभ और अमृत के चौघड़िया घट स्थापना अथवा शुभ कार्य में बहुत ही श्रेष्ठ होते हैं।

जिनका विवरण इस प्रकार है:

1.शुभ के चौघड़िया –  06:52 बजे से 07:57 बजे तक।

2.चर के चौघड़िया- प्रातः 10:58 बजे से 12: 28 बजे तक।

 3. लाभ की चौघड़िया -दोपहर 

 12 :28 बजे से 13: 59 बजे तक.

इस चौघड़िया में 13:30 बजे से राहु काल आरंभ होगा,उसको छोड़ देना है।

उपरोक्त शुभ मुहूर्त में आप कलश स्थापना कर सकते हैं।

कलश स्थापना की पश्चात मां भगवती का आवाहन होता है। 

*कलश स्थापना की विधि*

सबसे पहले एक चौकी अथवा पटरा बिछाएं। पूरब की ओर मुख करके बैठे ।सामने चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं ।मां भगवती की मूर्ति रखें। अपने सामने बाएं हाथ पर मिट्टी के पात्र में मिट्टी रखें उसमें जौ बोएं।

ऊपर मिट्टी अथवा तांबे ,पीतल का कलश रखें ।कलश में गंगाजल डाल करके उसको शुद्ध जल से भरें।उसमें चावल ,बताशा, सुपारी ,सिक्का डालें। कलश में कलावा लपेटे और कलश के मुख पर आम के पल्लव रखें उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल  रखें और माला पहनाएं। वरुण देवता की प्रार्थना करें। 

आप अपनी दाएं हाथ की ओर पर दीपक जलाएं। यदि अखंड दीपक जलाना है तो उसकी रक्षा करें। 9 दिन तक वह खंडित नहीं होना चाहिए। 

उसकी पश्चात मां दुर्गा मां को चुन्नी 

ओढाएं ।चावल ,कलावा ,रोली मिष्ठान आदि से मां का आह्वान करें। उनको टीका लगाए अपने लोकाचार के अनुसार पूजा करें ।  आरती करें और मां को भोग लगाएं।

नीचे लिखे मंत्रों में से किसी एक मंत्र जाप कर सकते हैं।

ॐ दुर्गायै नमः।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।

ओम् सर्व मंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

अथवा दुर्गा सप्तशती में वर्णित  तांत्रिक देवी सूक्तम् का पाठ कर सकते हैं।

पं. शिव कुमार शर्मा,

ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु कंसलटेंट गाजियाबाद

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

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