
बुलंदशहर{मनस्वी वाणी} । सिकंदराबाद क्षेत्र में वर्ष 2005 में किशोरी के अपहरण और उसे अवैध रूप से छिपाकर रखने के मामले में न्यायालय ने 21 साल बाद फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (कक्षा-12) गोपाल जी की अदालत ने आरोपी महेश कुमार को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी वादी मुकदमा की 15 वर्षीय पुत्री को महेश कुमार निवासी ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर बहला-फुसलाकर ले गया था। महेश वादी के पुत्र के साथ फैक्टरी में मजदूरी करता था और दोस्ती के कारण उसका घर आना-जाना था। इसी का फायदा उठाकर वह एक अप्रैल 2005 को किशोरी को लेकर फरार हो गया।काफी तलाश के बाद भी जब सुराग नहीं लगा तो थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले में महेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और जांच कर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी। न्यायालय ने अब दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों के बयानों को सुनने के बाद महेश कुमार को दोषी पाया है। अर्थदंड न भरने पर महेश को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।



