गाजियाबाद

अब नहीं लगाने होंगे जीडीए के चक्कर, 13 से विशेष कैंप में होगा मौके पर समाधान

नामांतरण और रजिस्ट्री के लंबित मामलों के निस्तारण को छह दिवसीय विशेष अभियान

मनस्वी वाणी, संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) से जुड़ी संपत्तियों के नामांतरण और रजिस्ट्री में लंबित मामलों से परेशान आवंटियों के लिए राहत भरी खबर है। जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल की पहल पर 13 अप्रैल से 18 अप्रैल तक विशेष कैंप का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
जीडीए कार्यालय परिसर में आयोजित इस छह दिवसीय कैंप का समय प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक निर्धारित किया गया है। कैंप के दौरान नामांतरण एवं रजिस्ट्री से जुड़े सभी कार्य एक ही स्थान पर संपन्न कराए जाएंगे, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने बताया कि प्राधिकरण को बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन प्राप्त हो रहे थे, जिनमें नामांतरण और रजिस्ट्री के प्रकरण लंबे समय से लंबित थे। इससे आवंटियों को समय और धन दोनों की हानि उठानी पड़ रही थी। इसी समस्या के समाधान के लिए यह विशेष कैंप आयोजित किया जा रहा है।
कैंप में संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर मौजूद रहेंगे और आवेदनों की जांच कर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करेंगे। साथ ही दस्तावेजों की जांच, आवश्यक औपचारिकताएं और प्रक्रिया से संबंधित मार्गदर्शन भी वहीं उपलब्ध कराया जाएगा।
उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कैंप के संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और अधिक से अधिक लाभार्थियों को इसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि यह पहल जनसुविधा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जीडीए प्रशासन ने सभी आवंटियों एवं संपत्तिधारकों से अपील की है कि वे 13 से 18 अप्रैल के बीच आयोजित इस विशेष कैंप में पहुंचकर अपने लंबित नामांतरण एवं रजिस्ट्री संबंधी प्रकरणों का समाधान कराएं। उम्मीद है कि इस अभियान से बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निस्तारण संभव हो सकेगा और लोगों को राहत मिलेगी।

Sandeep Singhal

संदीप सिंघल गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ उठाते आ रहे हैं। उनकी लेखनी तथ्यात्मक, निर्भीक और जनभावनाओं को प्रतिबिंबित करने वाली मानी जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button