
भीषण गर्मी में बिजली की हकीकत
- 44 डिग्री टेम्परेचर में तार होते हैं गर्म
- क्या इंसान, क्या मशीन थोड़ा धैर्य, थोड़ा सहयोग!
एमजे चौधरी
गाजियाबाद। भीषण गर्मी में बिजली की अघोषित कटौती के बीच बिजली विभाग के अधिकारियों ने जनता से एक मार्मिक अपील करते हुए कहा कि थोड़ा धैर्य रखें, क्योंकि 45 डिग्री टेंपरेचर में बिजली के तारों को गर्म होने पर उन्हें रेस्ट दिया जाता है, जिससे बड़ा हादसा ना हो और आमजन को राहत प्रदान की जा सके। इस मामले में विद्युत विभाग के अधिकारियों एक्सईएन अंकित सिंह, एसडीओ मसूरी अंकित कुमार और जेई मनोज कुमार ने अपील करते हुए कहा कि ग्रामवासियों आज हमारा पूरा प्रदेश और शहर सूरज की भीषण तपिश से झुलस रहा है। पारा 43℃ के पार जा चुका है, रातें 30℃ पर उबल रही हैं। इस असहनीय माहौल में हर कोई अपने घरों में एसी और कूलर के सहारे राहत ढूंढ रहा है। बिजली की मांग इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़कर 7,000 मेगावाट के पार जा चुकी है।
लेकिन इस संकट के बीच, हमें एक कड़वी मगर सच्ची हकीकत को समझना होगा।
गर्मी में मशीनें भी थकी हैं, उनकी भी एक सीमा है
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जिस तरह हाड़-मांस के बने हम इंसानों की सहने की एक निश्चित क्षमता होती है, ठीक वैसे ही लोहे और तारों से बनी इन मशीनों की भी एक सीमा होती है। 44-45 डिग्री की झुलसाती धूप में ये ट्रांसफॉर्मर और केबल बिना रुके, लगातार सुलग रहे हैं। जब क्षमता से अधिक लोड पड़ता है, तो ये मशीनें भी ‘हांफने’ लगती हैं और आखिरकार दम तोड़ देती हैं। यह समस्या किसी एक मोहल्ले या शहर की नहीं है, बल्कि इस रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी में पूरे देश की है।
हम भी किसी के बेटे, किसी के पिता हैं
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सोचिए, जब हम अपने घरों में कुछ मिनट के लिए बिजली चले जाने पर छटपटा उठते हैं, तब कर्मचारी इस जानलेवा धूप में, सड़कों पर, खंभों पर चढ़कर सुलगते हुए ट्रांसफॉर्मरों और फॉल्ट वाले केबलों को ठीक कर रहे होते हैं।
हम भी इसी समाज का हिस्सा हैं।
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हमारे शरीर में भी वही खून और पानी है जो इस गर्मी में सूख रहा है।
हम अपनी जान जोखिम में डालकर, अपनों को घर पर छोड़कर, सिर्फ इसलिए जूझ रहे हैं ताकि आपके घर का पंखा चल सके।
भीषण गर्मी आक्रोश नहीं, आत्मीयता की ज़रूरत है
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बिजली गुल होने पर आपका गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन उस गुस्से को उन बिजली कर्मियों पर निकालना जो खुद इस व्यवस्था को सुधारने में दिन-रात एक किए हुए हैं, कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। हम जादूगर नहीं हैं, हम भी इस व्यवस्था और प्रकृति की मार से जूझ रहे आम इंसान हैं।
उपभोक्ताओं से एक मार्मिक अपील की जाती है
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जब अगली बार बिजली जाए, तो सब्र का दामन थामें। विभाग के कर्मचारियों से विवाद करने के बजाय, उनके प्रति थोड़ी सहानुभूति और आदर रखें। इस अप्रत्याशित संकट के समय में पैनिक घबराहट न फैलाएं।
बेहतर होगा हम एक ज़िम्मेदार नागरिक का फर्ज़ अदा करें
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अनावश्यक लोड कम करें:
जिस कमरे में कोई न हो, वहां के एसी, कूलर और लाइट तुरंत बंद कर दें।
पीक आवर्स में सहयोग दें:
दोपहर और रात के समय जब बिजली की मांग सबसे ज़्यादा होती है, तब भारी बिजली उपकरणों जैसे वॉशिंग मशीन, पानी का पंप, या ई-व्हीकल चार्जिंग का उपयोग न करें।
स्वीकृत लोड का ध्यान रखें:
चोरी छिपे या बिना लोड बढ़वाए भारी उपकरण न चलाएं, क्योंकि आपका एक गलत कदम पूरे मोहल्ले को अंधेरे में धकेल सकता है।
भीषण गर्मी में समय कठिन है, गर्मी के कारण मौसम बेहाल है, लेकिन हमारा आपसी तालमेल और धैर्य इस जंग को आसान बना सकता है। बिजली कर्मियों के हौसले को तोड़िए मत, इस भीषण गर्मी में उनका संबल बनिए! शांति बनाए रखें, ज़िम्मेदारी निभाएं।



